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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 8
दीप्तमृगविहङ्गरुतः कलुषः सन्ध्यात्रयोत्थितोऽतिमहान् । भयकृत् तडिदुल्काद्यैर्हतो नृपं हन्ति शस्त्रेण ॥
यदि सूर्य की तरफ मुख किये हुये मृग और पक्षीगण के शब्दयुत, रूक्ष, तीनों सन्ध्याओं (प्रातः, मध्याह्न और सायं) में उत्पन्न और अतिविस्तृत परिवेष दिखाई दे तो भय करने वाला होता है।
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