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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 7
वर्णेनैकेन यदा बहुलः स्निग्धः क्षुराभ्रकाकीर्णः । स्वत्तों सद्यो वर्ष करोति पीतश्च दीप्तार्कः ॥
एक वर्ष याला, अधिक निर्मल और उस्तरे के समान मेघों से व्याप्त परिवेष अपने ऋतु में दिखाई दे तो शीघ्र दृष्टि करता है। यदि पीले वर्ण का परिवेष हो और उस समय के किशनीया हो भो भो वधि शीघ्र करता है।
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