कुबेर मेचक (मयूरकण्ठसदृश नील) वर्ण का परिवेष करता है। अन्य (इन्द्र आदि) मिले हुए रङ्ग के परिवेष करते हैं। जो परिवेष बार-बार उत्पन्न होकर नष्ट हो जाय, वह वायुकृत थोड़ा फल देने वाला होता है।
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