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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 22
नागरकाणामभ्यन्तरस्थिता यायिनां च बाह्यस्था। परिवेषमध्यरेखा विज्ञेयाक्रन्दसाराणाम् ॥
यदि परिवेष के अन्दर रेखा दिखाई दे तो नगरवासियों का, बाहर दिखाई दे तो गमन करने वाले विजयेच्छु राजाओं का और परिवेष के मध्य में रेखा दिखाई दे तो आक्रन्द ( 'आक्रन्दो दारुणे रणे' इत्यमरः।
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