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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 20
युवराजस्याष्टम्यां परतस्त्रिषु पार्थिवस्य दोषकरः। पुररोधो द्वादश्यां सैन्यक्षोभस्त्रयोदश्याम् ॥
यदि पञ्चमी में परिवेष दिखाई दे तो श्रेणी (समान जातियों के संप) का, षष्ठी में दिखाई दे तो नगर का और सप्तमी में दिखाई दे तो कोश का अशुभ करने वाला होता है। यदि अष्टमी में परिवेष दिखाई दे तो युवराज का तथा नवमी, दशमी और एकादसी में दिखाई दे तो राजा का अशुभ करने वाला होता है।
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