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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 2
ते रक्तनीलपाण्डुरकापोताभ्राभशवलहरितशुक्लाः । इन्द्रयमवरुणनिर्ऋतिश्चसनेशपितामहाम्बुकृताः ॥
ये परिवेष इन्द्र, यम, वरण, निऋति, वायु, शिव, बढ़ा और अग्निकृत क्रम से रक्त, मोल, थोड़ा-सा बेत, कबूतर के रङ्ग, मेघ वर्ण, शवल (कृष्ण-चेत), हरे और खेत वर्ण के होते हैं। जैसे- इन्द्रकृत रक्त, यमकृत नील, बरुणकृत थोड़ा बेत, निऋतिकृत कबूतर के रङ्ग, यायुक्त मेध वर्ण, शिपकृत शवल, ब्रद्धाकृत हरा और अग्निकृत बेत वर्ष का रोता है।
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