विप्रक्षत्रियविट्शूद्रहा भवेत् प्रतिपदादिषु क्रमशः । श्रेणीपुरकोशानां पञ्चम्यादिष्वशुभकारी ॥
प्रतिपदा आदि चार तिथियों में यदि परिवेष दिखाई दे तो ब्राह्मण आदि चार वर्षों का नारा होता है। जैसे-प्रतिपदा में परिवेष दिखाई दे तो ब्राह्मणों का, द्वितीया में दिखाई दे तो क्षत्रियों का, तृतीया में दिखाई दे तो वैश्यों का और चतुर्थी में दिखाई दे तो शूद्रों का नाश होता है।
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