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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 18
ताराग्रहस्य कुर्यात् पृथगेव समुत्थितो नरेन्द्रवधम् । नक्षत्राणामथवा यदि केतौनोंदयो भवति ॥
यदि केतु का उदय न हुआ हो तब ताराग्रह या नक्षत्र अलग-अलग परिवेषयुत हों तो राजा का नारा करते हैं।
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