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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 15
क्षुदनलमृत्युनराधिपशस्त्रेभ्यो जायते भयं केतौ । परिविष्टे गर्भभयं राहौ व्याधिर्नृपभयं च ॥
केतु पड़ा हो तो दुर्भिक्ष, अग्नि, मरण राजा और शस्त्र का भय होता है तथा परिवेष मण्डल में यदि राहु पड़ा हो तो गर्मभय, व्याधि और राजभय होता है।
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