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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 14
मन्त्रिस्थावरलेखकपरिवृद्धिश्चन्द्रजे सुवृष्टिश्च । शुक्के यायिक्षत्रियराज्ञीपीडा प्रियं चान्त्रम् ॥
युध पड़ा हो तो मन्त्री, स्पायर ( वृक्ष आदि) और लेखक की वृद्धि तथा सुन्दर वृष्टि होती है। शुक्र पड़ा हो तो गमन करने वाले क्षत्रियों तथा रानियों को पीड़ा और दुर्भिक्ष होता है।
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