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बृहत्संहिता • अध्याय 34 • श्लोक 12
परिवेषगतानां फलमाह परिवेषमण्डलगतो रवितनयः क्षुद्रधान्यनाशकरः । जनयति च वातवृष्टिं स्थावरकृषिकृन्त्रिहन्ता च ॥
यदि परिषेप मण्डल में सानि पढ़ा हो तो छोटे धान्यें ( कौनी आदि) का नारा, यायुयुत वृष्टि, स्थावर ( वृक्ष आदि) की हानि और किसानों का नाश करता है।
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