दो मण्डल वाला परिवेष सेनापति को भय करने वाला होता है; किन्तु अधिक शलभय करने वाला नहीं होता। तीन आदि (तीन, चार, पाँच) मण्डल वाला परिवेष शखकोप, युवराज को भय और शत्रुओं से नगर का अवरोध कराता है।
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