मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 9
प्रेतप्रहरणखरकर भनक्रकपिदंष्ट्रिलाङ्गलमृगाभाः गोधाहिधूमरूपाः पापा या चोभयशिरस्का ॥
यह प्रेत, शत्र, गदहा, ऊँट, नाक, बन्दर, दंष्ट्री (सूअर आदि), हल, मृग, गोह, साँप, धूम के समान या दो शिर वाली होती है। ये सब पाप फल देने वाली होती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें