प्रेतप्रहरणखरकर भनक्रकपिदंष्ट्रिलाङ्गलमृगाभाः गोधाहिधूमरूपाः पापा या चोभयशिरस्का ॥
यह प्रेत, शत्र, गदहा, ऊँट, नाक, बन्दर, दंष्ट्री (सूअर आदि), हल, मृग, गोह, साँप, धूम के समान या दो शिर वाली होती है। ये सब पाप फल देने वाली होती हैं।
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