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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 6
धिष्ण्या कृशाल्पपुच्छा धनूंषि दश दृश्यतेऽन्तराभ्यधिकम् । ज्वलिताङ्गारनिकाशा द्वौ हस्तौ सा प्रमाणेन ॥
धिष्ण्या पतली और छोटी पूँछ वाली, प्रज्वलित अग्नि के समान, दो हाथ लम्बी तथा दश धनुष प्रमाण प्रदेश के बीच में अधिक दिखाई देती है।
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