तारा फलपादकरी फलार्द्धदात्री प्रकीर्तिता धिष्णया । तिस्रः सम्पूर्णफला विद्युदयोल्काशनिश्चेति ॥
तारा पल का चतुर्याश, पिण्या फाल का आधा दया विद्युत्, उल्का, अरानि-ये तोसे सम्पूर्ण फत्त को देती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।