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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 29
सुरपतिचापप्रतिमा राज्यं नभसि विलीना जलदान् हन्ति । पवनविलोमा कुटिलं याता न भवति शस्ता विनिवृत्ता वा ॥
इन्द्रधनुष की तरह तथा आकाश में उत्पन्न होकर शीघ्र विलीन होने वाली उल्का भेषों का नाश करती है तथा वायु के प्रतिकूल टेढ़ी होकर चलने वाली और उत्पन्न होकर नीचे की तरफ नहीं चलने वाली शुभ नहीं होती है।
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