मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 27
हन्ति मण्डला पुरं छत्रवत् पुरोहितम् । वंशगुल्मवत् स्थिता राष्ट्रदोषकारिणी ॥
मण्डलाकृति बाली उल्का नगर का और छत्राकृति वाली पुरोहित का नाश करती है तथा वंशगुल्माकारा (बाँस की बीड़ के समान वाली) उल्का राष्ट्रभय करती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें