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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 23
क्ष्वेडास्फोटितवादितगीतोत्कृष्टस्वना भवन्ति यदा। उल्कानिपातसमये भवाय राष्ट्रस्य सनृपस्य ॥
यदि उल्कापात के समय में ध्वेडा (वीरों का गर्जन 'क्ष्वेडा तु सिंहनादः स्यादित्यमरः), आस्फोटित (छाती पर एक भुजा रखकर दूसरे हाथ से ताडन का शब्द), बाद्य और गान का उ‌द्घोषित शब्द हो तो राजा और राष्ट्र दोनों को भय के लिये होता है।
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