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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 21
आशाग्रहोपपाते तद्देश्यानां खले कृषिरतानाम्। चैत्यतरी सम्पतिता सत्कृतपीडां करोत्युल्का ॥
दिक्पति ग्रह यदि उल्का से हत हो तो उस दिशा में रहने वाले मनुष्यों को, खलिहान में गिरे तो किसानों को और छोटे मन्दिर के पास स्थित पूछ पर उल्का गिरे तो पूज्य व्यक्तियों को पीड़ित करता है।
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