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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 15
उत्तरदिगादिपतिता विप्रादीनामनिष्टदा रूक्षा । ऋज्वी स्निग्धाखण्डा नीचोपगता च तद्बुद्धयै ॥
उत्तर आदि दिशाओं में पतित उल्का क्रम से ब्राह्मण आदि वर्णों को अशुभ फल देती है। जैसे- उत्तर दिशा में गिरे तो ब्राह्मणों को, पूर्व में गिरे तो क्षत्रियों को, दक्षिण में गिरे तो वैश्यों को और पश्चिम में गिरे तो शूद्रों को अशुभ फल देती है। यदि वह उल्का सोधी, चिकनी, अखण्ड और आकाश के नीचे भाग में जाने वाली हो तो ब्राह्मण आदि वर्णों की वृद्धि करती है।
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