संस्पृशती चन्द्राकों तद्विसृता वा सभूप्रकम्पा च। परचक्रागमनृपभयदुर्भिक्षावृष्टि भयजननी ॥
जो उल्का सूर्य या चन्द्र को स्पर्श करती है अथवा सूर्य या चन्द्र से निकल कर भूकम्प करती हुई गिरती है, वह दूसरे राजा का आगमन, राजभय, दुर्भिक्ष करती है। और अवृष्टि
योल्का चन्द्रार्थी शशिसूयों संस्पृशती। ती संस्पृशति । तद्विसृता वा ताभ्यां चन्द्रा
कर्काभ्यां विसृता निर्गता। सभूप्रकम्पा च भूकम्पसहिता। तस्याः पतमानाया भूकम्पमुत्पद्यते।
सा तथाभूला परचक्रागमं परचक्रस्यागमनम्। नृपभयं राजभयम्। दुर्भिक्षभयम्। अवृष्टिभयं
च जनयत्युत्पादयति ।
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