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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 11
अम्बरमध्याद् बह्यो निपतन्त्यो राजराष्ट्रनाशाय । बम्भ्रमती गगनोपरि विभ्रममाख्याति लोकस्य ॥
आकाश मध्य में बहुत तरह की होकर गिरती हुई उल्का राजा और राष्ट्र के नाश के लिये होती है तथा जो उल्का आकाश में बार-बार भ्रमण करती है, यह लोगों की विपत्ति को व्यक्त करती है।
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