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बृहत्संहिता • अध्याय 33 • श्लोक 10
ध्वजझषगिरिकरिकमलेन्दुतुरगसन्तप्तरजतहंसाभाः । श्रीवृक्षवज्रशङ्ख स्वस्तिकरूपाः शिवसुभिक्षाः ॥
ध्वज, मत्स्य, हाथी, पर्वत, कमल, चन्द्रमा, घोड़ा, तपी हुई धूलो, हंस, श्रीवृक्ष (नारियल), वज्र ( हीरा या शत्र), शंख या स्वस्तिक (राजगृह की तरह) रूप वाली उल्का दिखाई दे तो लोगों का कुशल और सुभिक्ष करती है ।
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