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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 7
किन्त्वनिलदहनसुरपतिवरुणाः सदसत्फलावबोधार्थम् । प्राग् द्वित्रिचतुर्भागेषु दिननिशोः कम्पयिष्यन्ति ॥
जैसे कि दिन के पूर्व में बायु, उत्तरार्द्ध में अग्नि, रात्रि के पूर्वार्द्ध में इन्द्र और उत्तरार्द्ध में वरुण तुझे कम्पित करेंगे।
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