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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 4
भगवन्नाम ममैतत्त्वया कृतं यदचलेति तन्त्र तथा। क्रिचतेऽचलैश्चलद्धिः शक्ताहं नास्य खेदस्य ॥
आपने मेरा नाम अचला रखा है; पर चलायमान, भ्रमण करते हुए पर्वतों के द्वारा वह (नाम) वैसा नहीं रहा अर्थात् मैं चलायमान हूँ
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