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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 28
चलयति पवनः शतद्वयं शतमनलो दशयोजनान्वितम् । सलिलपतिरशीतिसंयुतं कुलिशघरोऽभ्यधिकं च षष्टितः ॥
यदि वायुमण्डल में भूकम्प हो तो दो सौ योजन तक, अग्निमण्डल में हो तो दश योजन तक, वारुण मण्डल में हो तो एक सौ अस्सी योजन तक और ऐन्द्र मण्डल में भूकम्प हो तो साठ से अधिक योजन तक पृथ्वी को कम्पित करता है।
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