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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 25
प्रथितनरेश्वरमरणव्यसनान्याग्नेयवायुमण्डलयोः क्षुद्धयमरकावृष्टिभिरुपताप्यन्ते जनाश्चापि ॥
यदि आग्नेय मण्डल और वायव्य वेला में या वायव्य मण्डल और आग्नेय बेला में भूकम्प हो तो विख्यात राजाओं को मरण या मरणतुल्य कष्ट होता है तथा मनुष्यगण दुर्भिक्ष, मृत्यु और अवृष्टि से पीड़ित होते हैं।
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