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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 22
वारुणमर्णवसरिदाश्रितघ्नमतिवृष्टिदं गोनर्दचेदिकुकुरान् किरातवैदै कान् विगतवैरम् । हन्ति ॥
अतिवृष्टि, परस्पर द्वेषरहित मनुष्य तथा गोनर्द, चेदी, कुकुर, किरात और वैदेह देश में रहने वाले मनुष्यों का नाश करता है।
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