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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 20
पौष्णाप्याश्लेिषामूलाहिर्बुध्न्यवरुणदेवानि मण्डलमेतद्वारुणमस्यापि भवन्ति रूपाणि ॥
रेवती, पूर्वाषाढ़ा, आर्दा, आश्लेषा, मूल, उत्तरभाद्रपदा, शतभिषा- ये सात नक्षत्र वरुणमण्डल के हैं।
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