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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 19
काशियुगन्धरपौरवकिरातकीराभिसारहलमद्राः अर्बुदसुराष्ट्रमालवपीडाकरमिष्टवृष्टिकरम् 1 ॥
काशी, युगन्धर, पौरव, किरात, कौर, अभिसार, हल, मद्र, अर्बुद, सुराष्ट्र और मालवदेशवासी मनुष्यों को पीड़ित करता है एवं प्रयोजन के अनुसार वृष्टि करता है।
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