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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 18
ऐन्द्रं स्तुतकुलजातिख्यातावनिपालगणपविध्वंसि । अतिसारगलग्रहवदनरोगकृच्छर्दिकोपाय ॥
ऐन्द्र कम्प में प्रधान कुल में उत्पन्न मनुष्य, यशस्वी, राजा और सङ्घियों में प्रधान का नाश करता है तथा अतिसार, कण्ठरोग, मुखरोग और कफ के रोग होते हैं।
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