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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 17
चलिताचलवर्षाणो गम्भीरविराविणस्तडिद्वन्तः । गवलालिकुलाहिनिभा विसृजन्ति पयः पयोवाहाः ॥
जैसे कि पर्वत के समान शरीर वाले, गम्भीर शब्द करने वाले, बिजली वाले, महिषशृङ्ग, प्रमरकुल और सपों के समान कान्ति वाले मेघ वर्षा करते हैं।
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