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बृहत्संहिता • अध्याय 32 • श्लोक 15
दीप्तौजसः प्रचण्डाः पीड्यन्ते चाश्मकाङ्गबाह्रीकाः । तङ्गणकलिङ्गवङ्गद्रविडाः शबरा अनेकविधाः ॥
लाशयों (वापी, कूप और तालाब ) का नाश, राजाओं में परस्पर द्वेष, दाह, विचचिंका, ज्वर, विसर्पिका और पाण्डु रोग होता है। यह तेजस्वी, क्रोधी मनुष्य, अश्मक, अङ्ग, बाह्रीक, तङ्गण, कलिङ्ग, वङ्ग, द्रविण
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