प्रसन (निर्मल) आकाश, विमल, (निर्मल) नक्षत्र, दक्षिणावर्त क्रम से पूमता हुआ वायु और सुवर्ण की तरह दिग्दाह हो तो राजा के साथ-साथ सब लोगों का हित करने वाला होता है।
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