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बृहत्संहिता • अध्याय 31 • श्लोक 4
पश्चात्तु शूद्राः कृषिजीविनश्च चौरास्तुरङ्गः सह वायुदिक्स्थे । पीडां व्रजन्युत्तरतश्च विप्राः पाखण्डिनो वाणिजकाश्च शार्थ्याम् ॥
पश्चिम दिशा में दिखाई दे तो शुद्र और किसानों को पीड़ित करता है। वायव्य कोण में दिखाई दे तो घोड़े के साथ चोरों को भी पीड़ित करता है। उत्तर दिशा में दिखाई दे तो ब्राह्मणों को पीड़ित करता है तथा ईशान कोग में दिग्दाह दिखाई दे तो पाखण्डी और व्यापारियों को पीड़ित करता है।
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