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बृहत्संहिता • अध्याय 31 • श्लोक 3
प्राक्क्षत्रियाणां सनरेश्वराणां प्राग्दक्षिणे शिल्पिकुमारपीडा । याम्ये सहोत्रैः पुरुषैस्तु वैश्या दूताः पुनर्भूप्रमदाश्च कोणे ॥
यदि पूर्व दिशा में दिग्दाह दिखाई दे तो वह राजा के साथ-साथ सभी क्षत्रियों को पीड़ित करता है। आग्नेय कोण में दिखाई दे तो शिल्पी (लुहार, सोनार आदि) और कुमारों को पीड़ित करता है। दक्षिण में दिखाई दे तो क्रूर मनुष्य, वैश्य, दूत और पुनर्भू त्रो (जो अक्षतपोनि होकर पुनः शादी करती है) को पीड़ित करता है।
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