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बृहत्संहिता • अध्याय 31 • श्लोक 2
योऽतीव दोप्या कुरुते प्रकाशं छायामपि व्यञ्जयतेऽर्कवद्यः । राज्ञो महद्वेदयते भयं स शस्त्रप्रकोपं क्षतजानुरूपः ॥
जो दिदाह अपनी अत्यधिक कान्ति से प्रकाशित होता है और सूर्य की तरह दृश्यमान द्रव्य की छाया को भी प्रकाशित करता है, यह राजा को अधिक भय देता है तया यदि यह रक्त वर्ण का हो तो रात्र का भय करता है।
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