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बृहत्संहिता • अध्याय 31 • श्लोक 1
दाहो दिशां राजभयाय पीतो देशस्य नाशाय हुताशवर्णः । यश्चारुणः स्यादपसव्यवायुः सस्यस्य नाशं स करोति दृष्टः ॥
यदि दिग्दाह पीत वर्ष का हो तो राजभय के लिये, अग्नि वर्ण का हो तो देशनाश के लिए और बायों तरफ लोहित वर्ण का यामु दिखाई दे तो धान्यों का नाश करता है।
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