सन्ध्याकाल में खण्ड, विषम, वर्णरहित, विकृत, कुटिल, अप्रदक्षिणक्रम से परिवेष्टित, सूक्ष्म, छोटा, शक्तिरहित तथा मलिन सूर्य का किरण हो तो मनुष्यों में परस्पर विरोध और वृष्टि को करता है।
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