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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 8
सन्ध्याकाले स्निग्धा दण्डतडिन्मत्स्यपरिधिपरिवेषाः । सुरपतिद्यापैरावतरविकिरणाचाशु वृष्टिकराः ॥
दण्ड, विद्युत्, मछली को आकृति याला मेघ, प्रतिसूर्य, परिघ, इन्द्रधनु, ऐरावत (४७ अध्याय २०याँ श्लोक), सूर्यकिरण- ये सब यदि सन्ध्याकाल में निर्मल हों तो सृष्टि करने वाले होते हैं।
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