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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 7
मन्दपवनावपट्टितचलितपलाशद्वमा विपवना वा। मधुरस्वरशान्तविहङ्गमृगरुता पूजिता सन्ध्या ॥
मन्द-मन्द चलती हुई हवा से कम्पित पत्रों से युक्त वृक्ष, वायु से रहित या मधुर शब्द करने वाले, शान्त पक्षी और मृगों से युक्त सन्ध्या शुभ होती है।
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