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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 6
गृहतरुतोरणमथने सर्पाशुलोष्टोत्करेऽनिले प्रबले । भैरवरावे रूक्षे खगपातिनि चाशुभा सन्ध्या ॥
गृह, बुथ और तोरण (पुरद्वार) को कम्मित करती हुई, धूली और मूलखण्डों से युद, प्रबल, भयंकर, रुख तथा आकाश से पक्षियों को गिराती हुई सन्ध्या समय की हया शुभ फल देने वाली होती है।
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