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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 3
भैरवमुच्चैर्विरुवन् मृगोऽसकृद् ग्रामघातमाचष्टे । रविदीप्तो दक्षिणतो महास्वनः सैन्यघातकरः ॥
बार-बार ऊँचा भयंकर शब्द करने बाला मूग ग्रामों के नाश का सूचक है तथा सेना के दक्षिण भाग में स्थित सूर्याभिमुख होकर भयंकर शब्द करे तो सेनाओं को नष्ट करता
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