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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 25
नृपविपत्तिकरः परियः सितः क्षतजतुल्यवपुर्वलकोपकृत् । कनकरूपधरी बलवृद्धिदः सवितुरुद्रमकालसमुत्थितः ॥
सूर्योदयकाल में उत्पत्र मेघरेखा यदि शुक्त वर्ष की हो तो राजा का नाश, रक्तवर्ण की हो तो सेना का नाश और सुवर्ण की तरह कान्ति याली हो तो सेनाओं को वृद्धि करती है।
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