सितसितान्तधनावरणं रवेर्भवति वृष्टिकरं यदि सव्यतः । यदि च वीरणगुल्मनिर्भर्घनैर्दिवसभर्तुरदीप्तदिगुद्धवैः ॥
शुक्त और शुभ (स्वच्छ) किरण वाले या बोरण (गांदर) के समान कान्ति बाले शान्त दिशा में उत्पत्र मेथ सूर्य के दक्षिण भाग को आभ्यादित करे तो वृद्धि करता है।
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