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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 23
आयुधभूष्त्रररूपं छिन्नानं परभयाय रविगामि । सितखपुरेऽर्काक्रान्ते पुरलाभो भेदने नाशः ॥
यदि सन्ध्याकाल में शल लिये हुए पुरुष को तरह मेघखण्ड दिखाई दे तो शत्रु का भय, सूर्य से आच्छादित और श्रेत वर्ण का गन्धर्व-नगर दिखाई दे तो पुर का लाभ और सूर्य से भेदित गन्धर्व-नगर हो हो पुर का नाश होता है।
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