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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 21
अशुभाकृतिधनगन्धर्वनगरनीहार घूमपांशुयुता प्रावृषि करोत्यवग्रहमन्यतर्ती शस्त्रकोपकरी ॥
गन्धर्वनगर, हिम, धूम और धूली से युक्त सन्ध्या वर्षाकाल में अवृष्टि तथा अन्य ऋतु में शख-कोप करती है।
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