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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 20
कुवलयवैदूर्याम्बुजकिञ्जल्कामा प्रभञ्जनोन्युक्ता । सन्ध्या करोति वृष्टिं रविकिरणोद्भासिता सद्यः ॥
नील कमल, वैदूर्य मणि या कमल के केशर की तरह कान्ति वाली, यायु से रहित और सूर्य के किरणों से प्रकाशित सन्ध्या हो तो उसी दिन वृष्टि करती है।
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