अरण्यवासी पशु, पक्षी, वायु, रवि-चन्द्र के परिवेष, प्रतिसूर्य, परिप, मेपरेखा,
वृक्षाकार मेघ, इन्द्रधनु, गन्धर्भनगर, सूर्य की रश्मि, दण्ड (रविकिरण, जल और बायु का
संपात), पूली-इन सथों के सन्ध्याकालिक स्नेह और वर्षों से फल कहना चाहिये।
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