अनुलोमगेऽभ्रवृक्षे शमं गते जायिनो नृपस्य बघः । बालतरुप्रतिरूपिणि युवराजामात्ययोमृत्युः ॥
शत्रु के ऊपर चढ़ाई करने वाले विजयेच्छु राजा के पीछे-पीछे कुछ दूर जाकर यदि
मेषवृक्ष नष्ट हो जाय तो उस राजा का मरण होता है। यदि बही मेघवृक्ष बाल (छोटे)
वृक्ष की तरह हो तो युवराज और मन्त्री का मरण होता है।
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